Sing the refrain once before the first stanza and after every stanza. The stanzas move from the Mother’s abode, to her form, to her miracles, to the devotee’s offerings, and finally to the blessing promised to all who sing. The traditional melody is the same familiar tune used for most North Indian aartis, set to a steady Keherwa rhythm with bell and conch.
ॐ जय जीण भवानी, मैया जय जीण भवानी।
रेवासा में विराजो, जग की महारानी॥
अरावली की गोद में, सोहे भवन तेरा, मैया…
दूर-दूर से आ के, भगत करें फेरा॥ ॐ जय…
सिंदूरी मुख चमके, नैनन में ज्योति, मैया…
गल में माला सोहे, जड़े हीरे-मोती॥ ॐ जय…
अष्ट भुजा अति सुंदर, शस्त्र लिए भारी, मैया…
दुष्ट दलन को आईं, भगतन हितकारी॥ ॐ जय…
भँवरों की सेना से, अरि दल को मारा, मैया…
अखंड जोत जला कर, भक्तों को तारा॥ ॐ जय…
लाल चुनर, नारियल, ध्वजा चढ़े भारी, मैया…
नवरातों में मेला, आवें नर-नारी॥ ॐ जय…
कुलदेवी तुम माता, सबकी रखवाली, मैया…
सुख-संपत्ति की दाता, शक्ति शुभ वाली॥ ॐ जय…
जीण भवानी की आरती, जो कोई नर गावे, मैया…
कहत भगत सुख पावे, संकट मिट जावे॥ ॐ जय…